मनाली की पहाड़ियों में छिपा एक रहस्य: वो लड़की जो बिना छुए हुई प्रेग्नेंट, जानिए उसकी अनसुनी कहानी उसी की ज़ुबानी।
नमस्कार, मैं हूं अर्नब चौधरी। वैसे तो हिमाचल का मनाली शहर अपनी एग्ज़ॉटिक ब्यूटी के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन आज इस शो पर हम ऐसी शख़्सियत को पेश करने जा रहे हैं, जिनकी वजह से मनाली जैसे शहर का नाम मिट्टी में मिलता हुआ नज़र आ रहा है। एक ऐसी लड़की, जिसका दावा है कि वो बिना किसी के छुए ही प्रेग्नेंट हो गई थी। अब इस बात में कितनी सच्चाई है ये हम जानेंगे आज के एपिसोड में। हमारे साथ हैं मनाली की ये रहसमयी लड़की जिनका नाम है- अनिका गुलेरिया।
होस्ट: मिस अनिका, आपकी कहानी सुनकर सारा हिंदुस्तान दंग रह गया है। मगर कई लोगों को इस बात पर विश्वास ही नहीं है… सबको लगता है ये कोई बहुत बड़ा पब्लिसिटी स्टंट है। इस पर आप क्या कहना चाहेंगी?
अनिका: ऐसी कौन-सी लड़की होगी जो अपनी ही इज़्ज़त इस तरह उछालना चाहेगी? मेरी कहानी भले ही सबको झूठी लगे, पर ये मेरी ज़िंदगी की कड़वी सच्चाई है, जिससे मैं आज तक भागती आ रही हूं। सब लोगों ने इधर-उधर से ही मेरे बारे में सुना है, पर अगर वो मेरी कहानी मेरी ज़ुबानी सुनेंगे तब उन्हें ज़रूर यक़ीन आएगा। इसलिए भी आज मैं आपके शो पर आई हूं…ताकि मैं सबको अपना सच ख़ुद बताऊ।
होस्ट: मिस अनिका, ज़रूर। गो अहेड... मेरे दर्शक भी ज़रूर सुनना चाहते हैं आपकी कहानी। शुरू से बताइए, आख़िर हुआ क्या था?
अनिका: ये सब तब से शुरू हुआ जब बचपन में ही मेरी माँ चल बसी और मेरे पापा गौतम गुलेरिया ने दूसरी शादी कर ली। सौतेली माँ की नफ़रत और बहन की जलन के बीच ही मैं बड़ी हुई और इन दोनों ने बचपन से ही मेरी ज़िंदगी नर्क बना दी। धीरे-धीरे मेरा वज़न भी बढ़ने लगा और 18 साल की उम्र तक मेरा वज़न 120 किलो हो गया। मैं बदसूरत दिखने लगी। इसी दौरान मेरे पापा ने फ़ौरन मेरी शादी शहर के मशहूर डोगरा ख़ानदान के वारिस कुणाल से कर दी।
होस्ट: ओह तो आप शादी-शुदा हैं?
अनिका: जी हां, लेकिन मेरे पति कुणाल ने तो मुझे कभी नज़र भरकर देखा तक नहीं। वो तो मुझसे इतनी नफ़रत करता था कि शादी करते ही वो मुझे छोड़कर दिल्ली चला गया। लेकिन शादी की अगली सुबह मैंने देखा कि मेरा पेट देखते ही देखते फूल गया। मैं किसी प्रेग्नेंट औरत की तरह दिख रही थी।
होस्ट: लेकिन मिस अनिका, आप 120 किलो की थी। पेट फूलना तो वज़न के कारण भी हो सकता है न?
अनिका: मुझे भी पहले यही लगा। लेकिन मेरे पेट में ज़ोर से दर्द हो रहा था। मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैं सीधे अपने पापा के घर चली आई। वहां मैंने अपने पापा को सब बताया पर दर्द ने मेरा हाल और बुरा कर दिया, मेरी आंखों के सामने सब धुंधला होने लगा और मैं वहीं बेहोश होकर गिर गई। फिर मेरी आंख अस्पताल में खुली, जहां डॉक्टर मुझे उठाने की कोशिश कर रही थी। मैं बेहोश थी पर मैंने डॉक्टर की बात सुनी तो मेरे पैरों तले ज़मीन ही खिसक गई। उन्होंने कहा कि मैं प्रेग्नेंट हूं।
होस्ट: शादी के अगले ही दिन प्रेग्नेंट? पर कैसे? आपका पति आपको शादी के दिन ही छोड़कर चला गया! ज़रूर आपका शादी से पहले कोई अफ़ेयर रहा होगा।
अनिका: ये क्या बोल रहे हैं आप? मेरे जैसी मोटी और भद्दी लड़की को भला अफ़ेयर चलाने के लिए मिलता ही कौन? शादी से पहले तो कोई लड़का मुझे ठीक से देखता तक नहीं था।
होस्ट: मिस अनिका, आपकी बात सही है लेकिन साइंस का क्या? क्योंकि प्रेगनेंसी के लिए तो दो लोग होना ज़रूरी है।
अनिका: मुझे नहीं पता ये सब कैसे हुआ। मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ है ये प्रेगनेंसी।
होस्ट: अच्छा तो फिर आगे क्या हुआ, मिस अनिका?
अनिका: प्रेगनेंसी की बात सुनकर जितना शॉक्ड मैं थी, उतने ही शॉक्ड मेरे पापा भी थे, जिन्होंने डॉक्टर की बात सुनते ही मुझे बेशर्म, बेहया जैसे कड़वे शब्द बोले। मैंने उन्हें समझाने की बोहत कोशिश की कि मैंने कोई गलत काम नहीं किया है और मैं नहीं जानती ये सब कैसे हो हुआ। इतने में डॉक्टर ने हमे टोकते हुए ये भी कहा कि मेरी प्रेगनेंसी 4 महीने की है तो एबॉर्शन का कोई सवाल ही नहीं।
होस्ट: 4 महीने की प्रेग्नेंट?
अनिका: हां…पापा और मैं दोनों वहां से निकल आए। पर पापा को मुझपे बिलकुल भी विश्वास नहीं था इसलिए उन्होंने घर आते ही घर में लगे सारे सीसीटीवी कैमरे की पिछले चार महीनों के फ़ुटेज छान मारी और वो देखकर पापा का भी सिर चकरा गया।
होस्ट: ऐसा क्या देख लिया आपके पापा ने? कहीं आपके नाजायज़ बच्चे का बाप तो नहीं देख लिया?
अनिका: जी नहीं। उन्होंने देखा कि मैं पिछले चार महीनों से घर के बाहर कहीं गई ही नहीं थी और न ही मुझसे से कोई मिलने आया था। और प्लीज़ आप ज़रा तमीज़ से बात कीजिए मुझसे!
होस्ट: माफ़ी चाहता हूं मिस अनिका पर ये मेरा काम है। ख़ैर,आगे बताइए।
अनिका: एक दिन मैं अपने घर के गार्डन के पेड़ों पर पानी छिड़क रही थी, तभी एक बाइक की आवाज़ ने मुझे सन्न कर दिया। उस बाइक में मेरा पति कुणाल डोगरा था। बाइक की आवाज़ सुनकर मेरे पापा भी वहां आ गए। वैसे तो कुणाल मुझसे नफ़रत करता था, पर उस दिन उसने मुझे इस प्रेग्नेंसी के लिए क्या-क्या नहीं बोला। उसने मेरे करैक्टर पर उंगली उठाई, उसने कहा कि मैं चाहती हूं कि वो मेरे बच्चे को अपना नाम दे। यहां तक कि उसने मेरे बच्चे को गटर का कीड़ा तक कह डाला! मुझे बहुत हर्ट हुआ और साथ ही ग़ुस्सा भी बहुत आया। अचानक मेरे अंदर अजीब-सी हिम्मत आ गई। और बिना कुछ सोचे, मैंने कहा कि मैं इस शादी को नहीं मानती!
ये सुनते ही पापा और कुणाल दोनों हैरान हर गए। क्योंकि मैं कभी किसी को पलटकर जवाब नहीं देती थी। लेकिन पापा ने बात संभालते हुए कुणाल से कहा कि वो मेरी बातों पर ध्यान न दे। मेरे पापा ने ये तक कह दिया कि मेरे बच्चे के पैदा होते ही उसे मुझसे हमेशा के लिए अलग कर दिया जाएगा।
होस्ट: अच्छा तो आपके पापा ने ऐसा कहा? आपको तो बहुत बुरा लगा होगा ये सुनकर?
अनिका: मुझे हमेशा से पता था कि मेरे पापा मुझसे नफ़रत करते हैं, पर वो इस हद तक गिर जाएंगे ये नहीं पता था मुझे! उनकी ये घिनौनी बात सुनते ही मुझे इतना बड़ा सदमा लगा कि अचानक मेरे पेट में ज़ोर से दर्द शुरू हो गया…मैं बेहोश हो चुकी थी और फिर बच्चे के रोने की आवाज़ से मेरी आंखें खुलीं। दो फूल जैसे प्यारे बच्चे मेरे बगल में लेटे हुए थे। मेरे जुड़वा बच्चे हुए, एक लड़का और एक लड़की। मैं बहुत ख़ुश थी…लेकिन तभी मेरी ख़ुशी को शायद मेरी ही नज़र लग गई।
होस्ट: क्यों मिस अनिका? क्या हुआ इसके बाद?
अनिका: अचानक एक नक़ाबपोश आदमी उन दोनों बच्चों को मुझसे छीनने की कोशिश करने लगा। मैं कमज़ोर थी, पर फिर भी मैंने पूरी कोशिश की अपने दोनों बच्चों को बचाने की लेकिन मैं सिर्फ़ अपनी बेटी को ही बचा सकी। वो नक़ाबपोश मेरे बेटे को ले गया! उस समय मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मेरा दिल निकाल कर ले गया हो।
होस्ट: लेकिन मिस अनिका, आपके बच्चे को किसने किडनैप किया? कहीं वो आपके पापा ही तो नहीं? और आपने अपने बेटे को ढूंढ़ने के लिए कुछ किया क्यों नहीं?
अनिका: मैं नहीं जानती कि वो कौन था। अपने बेटे को खोने का बहुत बड़ा सदमा लगा मुझे, जिसकी वजह से मेरी तबियत ख़राब रहने लगी। इसीलिए पापा ने मुझे और मेरी बेटी को बैंगलुरु मेरी मौसी के पास भेज दिया।
होस्ट: ओह तो फिर आप बैंगलुरु में रही? लेकिन एक सिंगल मदर, जो 18 साल तक अपने पापा पर आश्रित थी…आपके लिए तो ज़िंदगी काफ़ी मुश्किल हो गई होगी बैंगलुरु में? वैसे ही आपका वज़न देखकर कोई आपसे दूसरी शादी भी नहीं करता।
अनिका: बहुत मुश्किल था… लेकिन बैंगलुरु जाकर मैंने ख़ुद पर बहुत मेहनत की। मुझे बैंगलुरु में 6 साल बीत गए और इन 6 सालों में मैंने ख़ुद को बदलकर रख दिया। मैं पहले की तरह मोटी नहीं, बल्कि एक स्लिम फ़िगर वाली ख़ूबसूरत औरत बन चुकी थी। किसी के लिए भी मुझे पहचान पाना अब मुश्किल था। और अब मैं इतनी क़ाबिल हूं कि मुझे किसी मर्द की ज़रूरत नहीं ख़ुद का ख़याल रखने के लिए।
होस्ट: ये तो बहुत अच्छी बात है मिस अनिका। लेकिन अब मुझे ये बताइए कि इन 6 सालों में आप अपने घर क्यों नहीं गई?
अनिका: क्योंकि इन 6 सालों में मेरे पापा ने मुझे एक बार भी कॉल नहीं किया,और न ही मैं वापस उस जगह जाना चाहती थी। पर एक दिन अचानक उनका कॉल आया, मैं समझ गई मुझे मनाली जाना होगा। मैंने अपना समान पैक किया और बेटी रिया के साथ मनाली की फ़्लाइट में बैठ गई। जैसे ही फ़्लाइट लैंड हुई, मेरा फ़ोन बजा। फ़ोन उठाते ही पापा ने कहा कि कुणाल मुझे लेने एयरपोर्ट आएगा और मैं उसके साथ ही घर आऊं। साथ ही उन्होंने ये कहा कि घर पहुंचकर वो मुझे बताएंगे कि मुझे क्या करना है। मैं ये सुनकर सोच में पड़ गई कि आख़िर ऐसी कौन-सी बात करना चाहते हैं पापा मुझसे?
यही सब सोचते हुए मैं एयरपोर्ट के एग्ज़िट की ओर बढ़ती जा रही थी… तभी कुणाल की नज़र मुझ पर पड़ी और वो स्माइल करने लगा।
होस्ट: आपको देखकर स्माइल? पर वो तो आपसे नफ़रत करता था न?
अनिका: हां, पर मेरे बदले हुए रूप के कारण वो मुझे पहचान नहीं पाया था। और मेरे पास आकर मुझसे फ़्लर्ट करने लगा। पर अब मैं वो पुरानी वाली अनिका नहीं थी, जो ऐसे ही किसी की बातों में आ जाए। मैं उसकी बात को अवॉइड करते हुए टैक्सी को आवाज़ देने लगी.. इतने में कुणाल मुझसे मेरा नाम पूछने लगा।
होस्ट: तो फिर आपने उसे अपनी पहचान बताई या नहीं?
अनिका: मैंने बिना किसी भी हाव-भाव से धीरे से कहा, "अनिका गुलेरिया।"
होस्ट: क्या? आपने अपनी पहचान बता दी! तो फिर आपके पति कुणाल का रिऐक्शन तो देखने लायक़ होगा!
अनिका: हां… कुणाल ये सुनकर दंग रह गया। लेकिन तभी टैक्सी के अंदर से मैंने कुणाल के पीछे खड़े ड्राइवर के हाथ का बोर्ड दिखाते हुए उससे पूछा कि वो किसी अनिका गुलेरिया को पिक करने आया है न?
होस्ट: ओह, तो आपने बेचारे अपने पति को ठगा! काफ़ी चालाक हो गईं आप तो! पर ये चालाकी बैंगलुरु से आने के बाद ही थी या फिर इस पूरे समय आप कोई खेल ही खेल रही थीं?
अनिका: ज़िंदगी में इतना सब होने के बाद इंसान को थोड़ा चालाक बनना ही पड़ता है, सर।
होस्ट: ठीक है. आप कह रही है तो मान लेता हूं। ख़ैर आगे बताइए, फिर कुणाल का क्या रिऐक्शन था?
अनिका: कुणाल ने मुझे और मेरी बेटी को उसकी कार में जाने का ऑफ़र दिया और बोला कि वो उस मोटी को टैक्सी से भेज देगा। ये सुनकर मुझे ग़ुस्सा तो आया, पर मैं कुछ कह नहीं सकती थी उसे। फिर मेरी गाड़ी को जाते देख, उसने शायद अपने ड्राइवर को मेरी टैक्सी का पीछा करने का इशारा किया। मुझे उस वक़्त नहीं पता था कि उसका ड्राइवर मेरी गाड़ी का पीछा कर रहा है। इतने में मैं होटेल पैराडाइज़ पहुंच चुकी थी।
होस्ट: होटल पैराडाइज़? वो तो मनाली के सबसे महंगे होटलों में से एक है! मिस अनिका, आपके पास ये सब अफ़ोर्ड करने के पैसे कहां से आ रहे थे?
अनिका: इससे आपको क्या लेना-देना, सर? मैंने आपसे कहा न, I can take care of myself.
होस्ट: अच्छा चलिए जाने देते है इस बात को। आप आगे बताइए।
अनिका: बेटर। तो अपने आलीशान रूम में कुछ देर सुस्ताने के बाद मैंने होटेल रूम को बाहर से लॉक किया और लिफ़्ट का इंतज़ार करने लगी तभी मेरी असिस्टेंट राजलक्ष्मी का फ़ोन आया। मैंने फ़ोन पिक किया तो उसने बताया कि रोहित मारवा का मेल आया है। वो अपनी दादी माँ का इलाज देश की सबसे बड़ी न्यूरो सर्जन डॉक्टर अमृता यानी कि मुझसे करवाना चाहते हैं तो वो पूछ रही थी अपॉइंटमेंट फ़िक्स करना है या नहीं।
होस्ट: डॉक्टर अमृता? आपका नाम डॉक्टर अमृता कब से हो गया, मिस अनिका? दोहरी आइडेंटिटी जी रही हैं आप और चाहती हैं हम आप पर विश्वास भी करें?
अनिका: देखिए, नाम बदलने का हक़ हर किसी को है इस कंट्री में। और ये मेरी पर्सनल चॉइस है।
होस्ट: ये सही है। पर्सनल चॉइस! ख़ैर आगे बताइए प्लीज़।
अनिका: जी। मैंने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा, पीछे रिया खड़ी थी, उसका चेहरा कुछ उखड़ा हुआ था। मैंने नीचे झुककर प्यार से रिया के दोनों गालों पर किस किया और कहा कि मैं जल्दी वापस आ जाऊंगी और और आते वक्त उसकी फ़ेवरेट चॉकलेट आइस क्रीम लेकर आऊंगी।
जैसे ही मेरी लिफ़्ट नीचे गई, मेरे रूम के सामने वाले रूम का दरवाज़ा खुला, और उसमें से एक 26-27 साल का हैंडसम आदमी बाहर आया। ब्लैक ट्राउज़र्स, वाइट शर्ट और ब्लैक ब्लेज़र। ये आदमी मारवा इंडस्ट्रीज़ का सीईओ रोहित मारवा था। रोहित अपने कमरे से निकला और लिफ़्ट के पास खड़े बच्चे को डांटने लगा। वो उसे आर्यन कहकर बुलाने लगा और बोला कि बिना बताए कमरे से बाहर न निकला करे।
होस्ट: पर मिस अनिका, लिफ्ट के पास तो आपकी बेटी रिया थी?
अनिका: मुझे भी वही लगा था उस वक़्त… पर नहीं, ये मेरी बेटी रिया नहीं, बल्कि रोहित मारवा का इकलौता बेटा आर्यन था, जिसे मैं रिया समझ के गले लगा रही थी। मेरी रिया अभी भी हमारे कमरे में सो रही थी। रोहित, आर्यन से बात कर रहा था लेकिन आर्यन की नज़रें अभी भी लिफ़्ट के दरवाज़े पर जमी हुई थी। रोहित ने तुरंत फ़ोन निकाला और होटेल के सीसीटीवी रूम में फ़ोन कर के उसके रूम के बाहर का सीसीटीवी फ़ुटेज मंगवाया। कुछ ही पल में सिक्योरिटी इंचार्ज लैपटॉप पर सीसीटीवी फ़ुटेज लेकर आ गया। फ़ुटेज देखकर वो दंग हो गया।
होस्ट: दंग रह गया? क्या देखा उसने ऐसा? और उसके बेटे की शक्ल आपकी बेटी से कैसे मिलती है?
अनिका: उस समय मुझे नहीं पता था इस सबके बारे में। मैं तो अपने घर गुलेरिया हाउस चली गई थी। घर के मेन गेट से अंदर आते ही मुझे महसूस हुआ कि घर के अंदर पार्टी चल रही थी। वहां एक बोर्ड लगा हुआ था जिस पे लिखा था "Happy Birthday Kamini"। कामिनी मेरी सौतेली बहन है। अंदर आते ही मैंने देखा कि एक लड़की ज़मीन पर गिरी हुई थी, मुझे याद आया कि वो लड़की मेरी बुआ की बेटी प्रीति है।कामिनी के हाथ में मेरा पुराना फ़ोटो था। 6 साल बाद भी वो अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आई थी। वो अपनी सहेलियों को मेरा फ़ोटो दिखा कर पूछ रही थी कि इस मोटी और उसमें ज़्यादा ख़ूबसूरत कौन है। बेचारी मेरी कज़िन प्रीति ज़मीन पर गिरे हुए ही दबी आवाज़ में बोली कि उसकी अनिका दीदी बहुत सुंदर है। कामिनी के सारे दोस्तों ने अपना हाथ कामिनी को वोट देने के लिए एक साथ हवा में उठा लिए।
ये देखकर कामिनी और उसकी सहेलियां प्रीति को सज़ा देने लगीं। उन्होंने मेरी जली हुई फोटो जूस में डाली और प्रीति को पिलाने की कोशिश की। तभी मैंने कामिनी का हाथ पकड़कर उसे अचानक रोक लिया।मैंने कामिनी के हाथ से ग्लास छीनकर उसे कहा कि हार और जीत का फ़ैसला खेल ख़त्म होने के बाद होता है और खेल अब तक ख़त्म नहीं हुआ है।
होस्ट: खेल ख़त्म नहीं हुआ, इंटरेस्टिंग! तो फिर कामिनी ने क्या कहा?
अनिका: कामिनी और आसपास खड़े कामिनी के सभी दोस्त भी सरप्राइज़ हो गए। वो सोचने लगे कि 120 किलो की अनिका, आज इतनी फ़िट, फ़ाइन एंड गॉर्जियस कैसे दिखने लगी? सबकी बातें सुन मैंने कहा, "चलो जीत किसकी हुई ये तो पक्का हो गया अब जो सज़ा तय की थी वो पूरी कर ली जाए?" तभी पापा और मेरी सौतेली माँ मनीषा वहां आ गए। पापा ने गुस्से में कहा कि मैं मेहरबानी करके इन दो काग़ज़ात पर साइन कर दूं। दोनों काग़ज़ातों में से एक तो मेरे और कुणाल के डाइवोर्स पेपर्स थे। और दूसरा…मुझे तो बताते हुए भी शर्म आ रही है।
होस्ट: दूसरा क्या मिस अनिका? ऐसे कौनसे काग़ज़ात थे वो?
अनिका: मेरे पापा ने कहा कि मेरी माँ के गुज़र जाने के बाद उनकी फ़ार्मा कंपनी जो मेरे नाम पर हो गई थी, वो कंपनी मैं अपनी कामिनी को शादी के तोहफ़े में दे दूं।
होस्ट: ओह… तो फिर आपका क्या रिऐक्शन था इस पर?
अनिका: तलाक़ की बात सुनकर तो मुझे भी राहत मिली, तो मैंने वो तो साइन कर दिए। लेकिन अपनी माँ की कंपनी के काग़ज़ात उठा कर मैंने कहा कि अपना कहने को दुनिया में इस कंपनी के अलावा कुछ नहीं है मेरे पास। तो ये कंपनी मैं उनको नहीं दे सकती। इतना कहके मैं सीधा वहां से निकल गई।
होस्ट: आपने सीधा मना कर दिया? चलिए ये तो आपने अच्छा किया। पर उसके बाद आपको ज़रूर अपने घरवालों के रिऐक्शंस मिले होंगे?
अनिका: पापा ने तो कुछ कहा नहीं उस वक़्त। पर जैसे ही कुणाल को ये बात पता चली, वो घर के बाहर खड़ा होकर ग़ुस्से में तमतमाने लगा और चिल्लाने लगा। कुणाल की आवाज़ सुनते ही कामिनी डर गई, क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि कुणाल मेरा ये बदला हुआ रूप देखे। वो दौड़कर गार्डन के बाहर कुणाल के पास पहुंची और उसे मेरे बारे में मनगढ़ंत बातें कहने लगी। कहने लगी कि मुझे उससे मिलने में उसे शर्म आ रही थी और ये कि मैं अब 6 साल बाद और भी मोटी हो चुकी हूं। उसे ये भी कहा कि मम्मी-पापा अंदर बैठकर मुझसे डाइवोर्स पेपर्स पर साइन करवा रहे हैं। और उसने कुणाल और उसके दोस्तों के लिए बंगले के पीछे शानदार दावत भी रखी है। लेकिन उसी वक़्त कुणाल के फ़ोन पर उसके ड्राइवर राजू का मैसेज आया जिसमें लिखा था, "होटेल पैराडाइज़ इंटरनैशनल।"
होस्ट: तो उसके ड्राइवर को आपका पता मिल चुका था! फिर क्या हुआ, मिस अनिका?
अनिका: हां, इसके बाद कुणाल को दोस्तों में बिज़ी कर कामिनी मेरे पास आई और झट से मेरा हाथ पकड़ा,वो इधर-उधर देखते हुए मुझे घर के अंदर लाई और मुझसे पूछा कि मैं उससे क्या चाहती हूं। क्या ही चाहूंगी मैं अपनी छोटी बहन से! वो भले ही मेरी सौतेली बहन थी पर मैं बहुत केयर करती थी उसकी। मैंने उसे कहा भी कि कुणाल अच्छा लड़का नहीं है और वो उसके पीछे पागल न हो। पर ये सुनते ही कामिनी गुस्से में बोली कि अगर मुझे उसकी इतनी ही फ़िक्र है तो कंपनी उसके नाम क्यों न कर दूं। यहां तक तो ठीक था, पर उसके बाद उसने जो बोला वो मैं बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाई।
होस्ट: क्यों मिस अनिका? ऐसा क्या कहा उसने?
अनिका: उसने मुझसे पूछा कि…क्या मैंने अपने किसी यार के लिए ये कंपनी बचा कर रखी है या अपनी नाजायज़ औलाद के लिए। मेरी बेटी को नाजायज़ कहा उसने! इसके पहले कि कामिनी अपनी बात ख़त्म कर पाती, मैंने उसे एक ज़ोरदार तमाचा जड़ते हुए गुस्से में कहा कि ख़बरदार अगर मेरी बच्ची को नाजायज कहा तो, ज़बान खींच लूंगी।
होस्ट: ओह कामिनी का कमेंट था तो सच में काफ़ी mean! लेकिन उन्होंने सही तो कहा। बिन बाप की बेटी को और क्या कहेंगे लोग?
अनिका: देखिए, आप अपनी हदें पार कर रहे है, सर! इन 6 सालों में मैं आज तक अपनी ज़िन्दगी की इस पहेली को सुलझा नहीं पाई हूं कि जब मुझे किसी भी लड़के ने छुआ तक नहीं तो फिर भी मैं कैसे प्रेग्नेंट हो गई थी?
होस्ट: माफ़ी कीजिए मिस अनिका, मैं बस समाज का आईना आपको दिखा रहा था। ख़ैर आगे बताइए आप प्लीज़।
अनिका: कुछ नहीं फिर होटेल की ओर जाते हुए, मुझे रिया से अपना प्रॉमिस याद आया, मैंने टैक्सी रास्ते में रुकवाई और उसके लिए चॉकलेट आइस क्रीम ख़रीद ली। फिर मैं सीधा होटेल पैराडाइज़ इंटरनैशनल पहुंच गई। होटेल के रिसेप्शन से होकर मैं लिफ़्ट के पास पहुंचने ही वाली थी कि चार पांच बॉडीगार्ड्स ने मेरा रास्ता रोक लिया।
होस्ट: बॉडीगार्ड्स? किसके बॉडीगार्ड्स?
अनिका: मैं भी बॉडीगार्ड्स को देखकर थोड़ी-सी घबरा गई, मुझे लगा कंपनी पाने के लिए तो नहीं किसी ने उसके लिए गुंडे भेज दिए हैं?
होस्ट: लेकिन कौन थे वो लोग और आख़िर आपको क्यों रोका उन लोगों ने? और क्या राज़ है आपकी प्रेग्नेंसी का? आख़िर रोहित के बेटे और आपकी बेटी की शक्ल हूबहू एक जैसी कैसे हो सकती है?
अनिका: मैंने आपको आजतक की अपनी सारी कहानी बता दी है। लेकिन आपको अगर मेरी कहानी और गहराई से समझनी है तो उसके लिए पढ़िए Pocket Novel App पर best seller novel ‘Ek Ladki Ko Dekha Toh’